बुधवार, 1 अगस्त 2012

ये प्रीत है प्यारी निज देश हमारी

ये  प्रीत है प्यारी निज देश हमारी
हम हैं प्रेम पुजारी बात यह जाने दुनियां सारी
हमें करनी है एक मिलकर दुनियां सारी
प्रेम से सींचकर लगनी है हमें मुहब्बत की फुलवारी

धरती हमारी यह अम्बर सारा
मुब्बत ही रीत है प्रीत का नारा
बरसें खुशियाँ हर मौसम महके
यह सारा जहाँ है जो मीत हमारा

दीपक की रोशनी आँगन में उजाला
मत यह हमारी इसी ने हमको पाला
आबाद है नफ़रत इसी सरजमीं पर
सेंध है जब हर जगह तो क्या करेगा रखवाला

आजाद हो हर जिंदगी बंदिशें हटें
इंसान हुकूमत से नजरें मिलकर डटें
चल निकले वतन में अमान की हवा
हर इंसान शांति का जप रटें

प्यार के नामपर धरके हरदिलजहाँ
दिल में चाहत उमंग की रसना बरसे सारी
मिलती हैं खुशिया सदाबहार वहाँ
खिलती है जहां कुदरत की फुलवारी
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2 प्रतिक्रियाएँ:

  1. सुन्दर , अति सुन्दर .

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.

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  2. अतिसुंदर...
    गहन अर्थ लिए हुए एक लाजवाब कृति |

    मेरा ब्लॉग आपके इंतजार में,समय मिलें तो बस एक झलक-"मन के कोने से..."
    आभार..|

    उत्तर देंहटाएं

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