शनिवार, 17 मार्च 2012

सिरमौर हुए सितारों में...

नमस्कार दोस्तों,
                          सबसे पहले मैं श्रीमती एवं (स्वर्गीय) श्री प्रोफ़ेसर रमेश तेंदुलकर, श्री अजीत तेंदुलकर, गुरु श्री आचरेकर, श्रीमती डा अंजलि तेंदुलकर, १२१ करोड़ भारतीयों और भारत रत्न के सबसे योग्य प्रत्याशी विनम्र श्री सचिन तेंदुलकर को उनके महाशतक के लिए हार्दिक बधाई देना चाहूँगा...!!!

                          दोस्तों बहुत दिन हुए कुछ अच्छा लिखे आज दिल झूम रहा था की कुछ लिखूं  और बाँट लूँ आपके साथ ........एक तरफ हिंदुस्तान की जनता बजट के खुमार में फंसी है मगर सचिन के महाशतक ने इसे कुछ हल्का किया...

सबसे  पहले कुछ पंक्तियाँ सचिन के लिए...

घुल-घुल ऐसे आप घुले
सिरमौर हुए सितारों में
ऐसी मस्ती आज ही देखी
पड़ गये, फीके रंग बहारों के...

                           

एक ताला आलोचकों की जुबान पर...

हार हुई हो लाख भले
रुका था शेर अखाड़ों में
आलोचकों का तीखा शौर
आज दब ढोल नगाडों में...

कच्चे कंचों से खेल न जीते
उतरे हैं पार अंगारों से
हस्ती समंदर की वो क्या जानें 'सागर'
जो  पड़े हैं शेष किनारों पे...



बजट  की तलवार और बेबस जनता...

बजट शतक की तो बात हीछोड़ो
सोचता कौन है आम जनता के बारे में
कर भंवर में फंसी है ऐसी
बिक  गए लोग बाजारों में...

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21 प्रतिक्रियाएँ:

  1. सार्थक और सामयिक पोस्ट, आभार.

    कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर पधार कर अपनी राय प्रदान करें.

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  2. उत्तर
    1. ब्लॉग पर आने और मेरी कृति का मूल्यांकन करने का शुक्रिया मृदुला जी...आपका मार्गदर्शन रहा तो और भी अच्छी रचनाएँ होंगी...

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  3. बेहतरीन पोस्ट!
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर !

    सादर
    -----
    ‘जो मेरा मन कहे’ पर आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्तर
    1. वक्त की मांग थी सो पूरी कर दी...

      हटाएं
  5. उत्तर
    1. प्रतिउत्तर के लिए धन्यवाद...

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  6. Hello Kumar..
    thanks 4 following me..
    u have a lovely blog..
    hope to c u more !!

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  7. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  8. a true articulation of what Indian Cricket fans felt on the unforgettable day
    Thank you, for the exceptional creativity that you always share with us!

    उत्तर देंहटाएं
  9. उसकी गरज के आगे समंदर सहम जाते हैं,
    उसकी सीमा के आगे आसमान सिमट जाते हैं,
    उसके तेज में सूरज भी कुछ मद्धिम सा लगता है,
    फिर भी करोड़ों की ज़िन्दगी में मुस्कान का सबब वो है

    युहीं हम किसी को 'भगवान्' नही कहते ||


    badhaiyaan kumar sahab ek mahaan shakhsiyat ko sundar adaranjali....!!

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  10. बहुत सुंदर और सटीक प्रस्तुति...

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कृपया इस रचना के लिए अपनी कीमती राय अवश्य दें ...धन्यवाद