गुरुवार, 17 नवंबर 2011

जाने कँहा गए वो दिन...


जाने कँहा गए वो दिन जब वो कहते थे
तेरी राह में पलकें हम बिछायेंगे
रूठ जाओगे तो तुम हम मनाएंगे
हर कदम पर साथ निभाएंगे
छोड़कर तुम्हें कभी न जायेंगे
जाने कँहा गए वो दिन जब
वो कहते थे
की तुम हंसोगे तो हम मुस्कुराएंगे
तुम रोओगे तो आंसू छलक जायेंगे
जाने कँहा गए वो दिन...

जाने कँहा गए वो दिन...
जाने कँहा गए वो दिन...

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1 प्रतिक्रियाएँ:

  1. गज़ब का बिम्ब प्रस्तुत किया है। हम सबके साथ भी यही होता है।

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